बदलते समय के साथ प्यार और रिश्तों की परिभाषा भी धीरे-धीरे बदल रही है. अब रिलेशनशिप के नए कॉन्सेप्ट प्यार के पुराने विचारों को चुनौती दे रहे हैं. सॉलो पॉलीऐमोरी एक ऐसा ही डेटिंग ट्रेंड है.
इसमें व्यक्ति कई रोमांटिक या सेक्सुअल रिलेशन में रहता है, लेकिन किसी से भी कमिटेड नहीं होता है. खासकर युवा पीढ़ी के बीच यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.
रिश्ते में पर्सनल स्पेस की नयी परिभाषा
सॉलो पॉलीऐमोरी को आज की जनरेशन एक तरह के पर्सनल स्पेस या आजादी के तौर पर देख रही है. इसमें व्यक्ति अपनी शर्तों पर रिलेशनशिप में रहता है. इसमें एक साथ कई लोगों के साथ रिलेशन को धोखे या चीटिंग के तौर पर नहीं देखा जाता है.
शादी और ट्रेडिशनल लव स्टाइल से परहेज
आज की जनरेशन का नजरिया चीजों को देखना का बहुत अलग है. पहले जहां लोग शादी और प्रेम को पवित्र और जीवन के सुख-दुख में पार्टनर की जरूरत को अहमित देते थे. वहीं अब ये सब कुछ सिर्फ बोरियत और जिम्मेदारी से भरे शब्द बनकर रह गए हैं. आज की जनरेशन के लिए लाइफ को इंजॉय करने का मतलब किसी एक के साथ जीवन भर बंधने की बजाय चीजों को एक्सप्लोर करना है.
पुरुष ज्यादा फॉलो कर रहे ये ट्रेंड
एक 2022 के सर्वे में यह सामने आया कि भारत में 61% लोग पॉलीगैमस रिश्तों में रुचि रखते हैं. इस ट्रेंड को केवल अविवाहित लोग ही नहीं, बल्कि विवाहित लोग भी अपनाते हैं, जो अपनी शादी के बाहर भी कई रिश्ते रखते हैं. ऐसा करने वालों में सबसे ज्यादा पुरुष शामिल हैं.
सॉलो पॉलीऐमोरी के नुकसान
हालांकि यह डेटिंग ट्रेंड आजादी का आभास करवाता है. लेकिन इसके कुछ मानसिक और शारीरिक जोखिम भी हैं. इस तरह के रिश्ते में रहने वाले लोग अक्सर अकेलेपन और भावनात्मक दूरी का सामना करते हैं. जिसके कारण चिंता या अवसाद जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. साथ ही, कई पार्टनर्स के साथ शारीरिक संबंधों में यौन संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है.